ग्रीन एसएम टैक्सी ड्राइवरों का गुस्सा:- वियतनाम की विनफास्ट समर्थित ग्रीन एसएम इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा ने दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में शुरुआत की थी। कंपनी ने ड्राइवरों को आकर्षक सैलरी और यात्रियों को प्रीमियम अनुभव का वादा किया था। लेकिन लॉन्च के कुछ दिनों बाद ही ड्राइवरों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि वादे के मुताबिक कमाई नहीं हो रही।
ड्राइवरों की मुख्य शिकायतें
कई ड्राइवरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी दिक्कतें बताई हैं। कंपनी ने भर्ती के समय ₹35,000 से ₹40,000 तक की गारंटीड मासिक सैलरी का वादा किया था। लेकिन एक ड्राइवर का कहना है कि 20 दिनों की मेहनत के बाद उसे सिर्फ ₹700 मिले। दूसरे ने ₹1,100 की राशि बताई। एक रिपोर्ट के अनुसार, एक ड्राइवर को पूरे हफ्ते में सिर्फ ₹1,064 मिले, जबकि वादा ₹8,000 के करीब था।
ड्राइवरों का आरोप है कि शुरुआती दो महीनों के लिए बिना बुकिंग के भी फिक्स सैलरी देने का वादा किया गया था, लेकिन नियम अचानक बदल दिए गए। इसके अलावा पेमेंट में देरी और कमीशन में कटौती की भी शिकायत है।
कमीशन और अन्य मुद्दे
कंपनी ने हर ट्रिप पर 35% कमीशन देने का दावा किया था, लेकिन ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें सिर्फ 33% ही मिल रहा है। FASTag बैलेंस न होने की वजह से टोल टैक्स ड्राइवरों को अपनी जेब से भरना पड़ रहा है, जो वापस नहीं मिलता।
दिल्ली-एनसीआर में 1,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां उतारी गई हैं। कंपनी का मॉडल Ola-Uber से अलग है, जहां गाड़ियां कंपनी की हैं और ड्राइवर सैलरी पर काम करते हैं। लेकिन शुरुआती दौर में कम बुकिंग और नियमों में बदलाव ने ड्राइवरों को निराश किया है।
कंपनी का पक्ष और बैकग्राउंड
ग्रीन एसएम ने बयान जारी कर कहा है कि वह ड्राइवरों की फीडबैक सुन रही है। कंपनी ने ड्राइवरों से मुलाकात कर समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही है। विनफास्ट के पास वियतनाम, इंडोनेशिया जैसे देशों में सफल अनुभव है, लेकिन भारत की प्रतिस्पर्धी बाजार में यह शुरुआती चुनौती है।
कुछ ड्राइवरों ने सकारात्मक अनुभव भी साझा किए हैं। एक ड्राइवर ने बताया कि वह ₹40,000 से ज्यादा कमा रहे हैं और कार की परफॉर्मेंस से संतुष्ट हैं। लेकिन बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने से कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
बाजार पर असर और भविष्य
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब ब्लूस्मार्ट जैसी सेवाएं बंद हो चुकी हैं। ग्रीन एसएम को Ola-Uber का मजबूत विकल्प माना जा रहा था, खासकर साफ-सुथरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के कारण। लेकिन ड्राइवरों की समस्याएं हल नहीं हुईं तो सेवा प्रभावित हो सकती है।
कंपनी का प्लान अन्य शहरों में विस्तार का है। अगर मुद्दों का जल्द समाधान हो गया तो यह EV टैक्सी सेक्टर के लिए अच्छा उदाहरण बन सकता है।