केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने 22 जून 2026 को कहा कि देश के सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स पर लगे फेशियल रिकग्निशन कैमरे दिल्ली में प्रस्तावित डेटा फ्यूजन सेंटर से जुड़ेंगे। इससे सुरक्षा निगरानी और संदिग्धों की पहचान में क्रांतिकारी सुधार होगा।
CISF की नई पहल: डेटा फ्यूजन सेंटर का प्रस्ताव
नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में CISF मुख्यालय की नींव रखने के मौके पर DG प्रवीर रंजन ने यह जानकारी दी। एयरपोर्ट्स के अलावा देशभर में CISF की सुरक्षा में आने वाले महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर लगे करीब 1.5 लाख सर्विलांस कैमरों के फीड को भी इस केंद्र से जोड़ा जाएगा। यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय के विचाराधीन है।
विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता जैसे छह प्रमुख एयरपोर्ट्स पर लगे फेशियल रिकग्निशन कैमरे नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) से भी इंटीग्रेट किए जाएंगे। इससे रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, संदिग्धों की त्वरित पहचान और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बेहतर सहायता मिल सकेगी।
NATGRID से जुड़ने के फायदे
NATGRID एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म है जो पुलिस और जांच एजेंसियों को सरकारी तथा निजी डेटाबेस तक रीयल-टाइम पहुंच प्रदान करता है। गृह मंत्रालय ने राज्यों से अपील की है कि वे इस प्लेटफॉर्म का उदारतापूर्वक उपयोग करें। इसमें ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन, आधार, एयरलाइन डेटा, बैंक रिकॉर्ड, FASTag, पासपोर्ट, विदेशियों और भारतीयों की यात्रा विवरण, वित्तीय खुफिया इकाई की संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट, रेलवे यात्री जानकारी और सोशल मीडिया पोस्ट्स से डेटा निकालने तथा विश्लेषण करने की सुविधा है।
यह एकीकरण सुरक्षा बलों को अलग-अलग स्रोतों से जानकारी इकट्ठा करने की बजाय एक ही जगह पर उपलब्ध कराएगा। एयरपोर्ट सुरक्षा में मात्र 30 प्रतिशत हिस्सा ही दृश्यमान होता है, बाकी अत्याधुनिक तकनीक पर निर्भर है। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम फ्यूजिटिव्स और संदिग्धों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
देशव्यापी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती
CISF देश के 69 सिविल एयरपोर्ट्स और कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों जैसे पावर प्लांट्स, बंदरगाहों और मेट्रो नेटवर्क की सुरक्षा संभालता है। प्रस्तावित डेटा फ्यूजन सेंटर इन सभी जगहों से आने वाले विजुअल फीड को एकीकृत करेगा। इससे खतरों का पहले से पता चलने, पैटर्न पहचानने और सक्रिय प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते एयर ट्रैवल और ड्रोन जैसे उभरते खतरों के बीच यह कदम सुरक्षा को और भरोसेमंद बनाएगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञ प्राइवेसी के मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम बताया जा रहा है।
आधुनिक सुरक्षा की जरूरत
आज की दुनिया में सुरक्षा अलग-अलग चेकपॉइंट्स तक सीमित नहीं रह गई है। बुद्धिमान डेटा एनालिटिक्स, रीयल-टाइम थ्रेट असेसमेंट और तकनीकी एकीकरण जरूरी हो गए हैं। CISF का यह प्रस्ताव ठीक इसी दिशा में है।
निष्कर्ष: CISF की इस पहल से देश की हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था में नया अध्याय शुरू होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ यात्री सुविधा भी बनी रहेगी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसका क्रियान्वयन सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।