सुजीत कलकल का जन्म 5 नवंबर 2002 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छोटे से गाँव इमलोटा में हुआ। उनके पिता दयानंद कलकल खुद राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं और उन्होंने बेटे को बचपन से ही कुश्ती सिखाई। सुजीत ने पारंपरिक अखाड़े की ट्रेनिंग के साथ-साथ तकनीक और फुटवर्क पर खास फोकस किया। 2021 में सोनीपत आकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग ली।
धीरे-धीरे जूनियर और यू-23 स्तर पर स्वर्ण पदक जीतते हुए वे सीनियर सर्किट में पहुंचे। 2025 में यू-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर उन्होंने बड़ी पहचान बनाई। 2026 में उन्होंने जाग्रेब, तिराना और एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर विश्व नंबर-1 रैंकिंग हासिल की।
सुजीत कलकल भारतीय कुश्ती के उभरते सितारे हैं जो 65 किग्रा वर्ग में बाजरंग पूनिया की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी शैली गति और आक्रामकता पर आधारित है।
हाल ही में प्रसिद्ध होने का कारण
अक्टूबर 2026 में एशियन गेम्स (आइची-नागोया) में पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में ताजिकिस्तान के अब्दुलमाजिद कुडिएव के खिलाफ 2-9 से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी कर 10-9 से स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले सेमीफाइनल में जापान के ओलंपिक चैंपियन कोतारो कियोका को भी हराया। यह भारत का 2018 के बाद कुश्ती में पहला एशियन गेम्स गोल्ड था और सुजीत को पूरे देश में सुर्खियों में ला दिया।