एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। जापान के आइची-नागोया में चल रहे इन खेलों में भारत के खाते में आज चार स्वर्ण पदक आए। इनमें से दो स्वर्ण पदक तो महज एक मिनट के अंतराल में हासिल किए गए। कुश्ती में सुजीत कलकल और बॉक्सिंग में अंकुश पंघाल की जीत ने पूरे देश को रोमांचित कर दिया। वहीं महिला बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन और परवीन हुड्डा ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किए। इन उपलब्धियों के साथ भारत के कुल स्वर्ण पदकों की संख्या 15 हो गई है और पदक तालिका में भारत 75 मेडल के साथ पांचवें स्थान पर काबिज है। इसमें 15 गोल्ड, 25 सिल्वर और 35 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
सुजीत कलकल की शानदार वापसी से मिला कुश्ती का गोल्ड
पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में सुजीत कलकल ने ताजिकिस्तान के अब्दुलमाजिद कुडियेव को 10-9 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। एक समय सुजीत 2-9 से पीछे चल रहे थे। लेकिन उन्होंने आखिरी कुछ मिनटों में जबरदस्त वापसी करते हुए तीन-चार टैकडाउन लगाए और आखिरी 11 सेकंड में जीत का पलड़ा अपने पक्ष में कर लिया। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने जापान के ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका को भी मात दी थी। सुजीत की यह जीत भारत के लिए एशियन गेम्स में कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक साबित हुई और 2018 के बाद यह श्रेणी भारत के पास वापस लौटी।
सुजीत कलकल पहले से ही एशियाई चैंपियन और अंडर-23 विश्व चैंपियन हैं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में ईरान के खिलाड़ी को तकनीकी श्रेष्ठता से हराया और राउंड ऑफ 16 में अफगानिस्तान के खिलाड़ी पर भी दबदबा कायम रखा। उनकी इस जीत ने भारतीय कुश्ती को नई ऊर्जा दी है।
अंकुश पंघाल ने बॉक्सिंग में रचा इतिहास
सुजीत की जीत से ठीक एक मिनट पहले अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में दक्षिण कोरिया के किम मिन-सियोंग को 4-0 से हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया। अंकुश का प्रदर्शन पूरी तरह से आक्रामक और नियंत्रित रहा। उन्होंने पहले राउंड से ही दबाव बनाए रखा और जजों के फैसलों में साफ बढ़त बना ली। यह जीत भारत के लिए पुरुष बॉक्सिंग में 2018 के अमित पंघाल के बाद पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक है। अंकुश ने सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के विश्व चैंपियन को भी हराया था, जो उनकी क्षमता को दर्शाता है।
अंकुश पंघाल कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता हैं और युवा होने के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना ली है। उनकी इस सफलता ने भारतीय पुरुष बॉक्सिंग की वापसी का संकेत दिया है।
महिला बॉक्सिंग में लवलीना और परवीन का कमाल
एशियन गेम्स 2026 में महिला बॉक्सिंग ने भारत का लंबा इंतजार खत्म कर दिया। लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में चीन की जियाई बाओ को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह जीत उनके 29वें जन्मदिन पर हुई, जिससे यह दिन उनके लिए और भी खास बन गया। लवलीना ने पिछले एशियन गेम्स में इसी वर्ग में सिल्वर जीता था। इस बार उन्होंने अपनी गलतियों से सबक लेते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। वे एमसी मेरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बन गईं।
इसके बाद परवीन हुड्डा ने 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन को 3-2 के कड़े मुकाबले में हराया। चेन पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन हैं। परवीन ने पहले राउंड में बढ़त बनाई, दूसरे में मुकाबला बराबर हुआ और तीसरे राउंड में जजों के फैसले से जीत हासिल की। परवीन की यह जीत उनके करियर में एक बड़े मोड़ जैसी है क्योंकि उन्होंने पहले निलंबन का सामना किया था और अब वापसी कर गोल्ड जीत लिया।
इन दोनों जीतों के साथ भारत ने बॉक्सिंग में तीन स्वर्ण पदक हासिल किए, जो एशियन गेम्स में देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। कुल मिलाकर बॉक्सिंग में भारत को छह मेडल मिले।
भारत की मेडल तालिका और समग्र प्रदर्शन
आज के इन चार स्वर्ण पदकों के अलावा तीरंदाजी और अन्य खेलों में भी भारत ने मेडल जोड़े। महिलाओं की रिकर्व टीम ने भी गोल्ड जीता। कुल मिलाकर भारत के पास अब 15 गोल्ड, 25 सिल्वर और 35 ब्रॉन्ज मेडल हैं। पदक तालिका में भारत पांचवें स्थान पर है। चीन अब भी टॉप पर है जबकि जापान और दक्षिण कोरिया आगे हैं। भारत का यह प्रदर्शन पिछले एशियन गेम्स की तुलना में गोल्ड की संख्या में सुधार दिखाता है।
एशियन गेम्स 2026 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चल रहे हैं। भारतीय दल ने कबड्डी, शूटिंग, एथलेटिक्स, क्रिकेट और तीरंदाजी में भी कई मेडल हासिल किए हैं। महिला और पुरुष कबड्डी टीमों ने भी गोल्ड जीता था। शूटिंग में मिश्रित ट्रैप टीम और अन्य इवेंट्स में सफलता मिली। यह सब मिलाकर भारत की समग्र तैयारियों और खिलाड़ियों की मेहनत का नतीजा है।
सुजीत कलकल, अंकुश पंघाल, लवलीना बोरगोहेन और परवीन हुड्डा जैसे खिलाड़ियों ने न सिर्फ मेडल जीते बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरणा भी दी। उनकी कहानियां संघर्ष, वापसी और दृढ़ संकल्प की मिसाल हैं। सुजीत का पिछड़कर जीतना, लवलीना का जन्मदिन पर गोल्ड और परवीन की कड़ी मुकाबले वाली जीत लंबे समय तक याद रखी जाएंगी।
निष्कर्ष: एशियन गेम्स 2026 में भारत का यह सुनहरा दिन देश के खेल प्रेमियों के लिए गर्व का विषय है। एक मिनट में दो गोल्ड और महिला बॉक्सिंग में ऐतिहासिक सफलता ने दिखा दिया कि भारतीय एथलीट विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। आगे के दिनों में और मेडल की उम्मीद है। जय हिंद!