भारत में स्टारलिंक के व्यावसायिक संचालन को सुरक्षा एजेंसियों ने अस्थायी रूप से रोक दिया है, लेकिन इससे देश का सैटेलाइट इंटरनेट का सपना नहीं टूटा है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसियों की चिंताओं के कारण यह फैसला लिया गया है, खासकर अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में सैटेलाइट टर्मिनल के दुरुपयोग को लेकर। फिर भी, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल पूरी तैयारी के साथ इस दौड़ में आगे हैं।

स्टारलिंक की राह में बाधा, लेकिन विकल्प तैयार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान जैसे क्षेत्रों में सैटेलाइट उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं ने स्टारलिंक की मंजूरी पर ब्रेक लगा दिया है। एलन मस्क की कंपनी के व्यावसायिक ऑपरेशन शुरू करने की योजना फिलहाल अटकी हुई है। हालांकि, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जरूरत को पूरा करने के लिए घरेलू दिग्गज कंपनियां पहले से ही सक्रिय हैं।

जियो और एयरटेल की साझेदारियां मजबूत

रिलायंस जियो ने लक्जमबर्ग की SES कंपनी के साथ पार्टनरशिप की है और MEO (मीडियम अर्थ ऑर्बिट) सैटेलाइट्स का इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी ने गुजरात, कोरबा और छत्तीसगढ़ जैसे इलाकों में सफल डेमो भी दिया है। वहीं, भारती एयरटेल ने Eutelsat OneWeb के साथ हाथ मिलाया है, जो LEO (लो अर्थ ऑर्बिट) नेटवर्क पर काम करता है। सेना पहले से ही OneWeb के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है।

सरकार से मिली मुख्य मंजूरियां

दोनों कंपनियों ने GMPCS लाइसेंस हासिल कर लिया है, जो सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं देने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पैन इंडिया ISP लाइसेंस भी उपलब्ध है। IN-SPACe से भी सैटेलाइट ऑपरेशन और कमर्शियल सेवाओं की मंजूरी मिल चुकी है। एयरटेल को गुजरात और तमिलनाडु में गेटवे स्थापित करने की अनुमति भी प्राप्त हो गई है।

अब सिर्फ स्पेक्ट्रम मंजूरी का इंतजार

जियो और एयरटेल को ज्यादातर मंजूरियां मिल चुकी हैं, लेकिन दूरसंचार विभाग और TRAI द्वारा स्पेक्ट्रम की कीमतों व आवंटन के अंतिम फ्रेमवर्क को कैबिनेट से मंजूरी अभी बाकी है। इस मंजूरी के मिलते ही दोनों कंपनियां देशभर में कमर्शियल सेवाएं शुरू कर देंगी। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचना आसान हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जियो का स्पेस फाइबर और एयरटेल का OneWeb नेटवर्क मिलकर स्टारलिंक की कमी को पूरा करेगा। इससे न सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ेगी बल्कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

निष्कर्ष: स्टारलिंक पर लगी रोक अस्थायी है, लेकिन जियो और एयरटेल भारत को सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया से जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। स्पेक्ट्रम फ्रेमवर्क की मंजूरी मिलते ही देश के करोड़ों लोग बेहतर इंटरनेट से जुड़ सकेंगे।