भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से सक्रिय हो रहा है। 4 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले अगले 10 दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश, गरज-चमक के साथ आंधी और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार द्रोणिका, चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्रों के प्रभाव से मौसम की गतिविधियां बढ़ गई हैं।

मानसून की वर्तमान स्थिति और आगे की गति

मानसून पहले ही दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में पहुंच चुका है। 3 जुलाई तक गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में इसकी आगे बढ़ने की प्रक्रिया जारी रही। अगले 4-5 दिनों में उत्तर अरब सागर, गुजरात, हरियाणा-पंजाब और राजस्थान के शेष हिस्सों में भी इसके और आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, जुलाई 2026 के पूरे महीने में देशभर में सामान्य से कम (94% LPA) वर्षा होने का अनुमान है, लेकिन शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वोत्तर भारत, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में अगले कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आंधी चलने की आशंका है। सिक्किम और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश से भूस्खलन और जलभराव का खतरा बना रहेगा। ओडिशा और बिहार में भी मध्यम से भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।

पश्चिमी और मध्य भारत में मानसून का प्रभाव

कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और विदर्भ में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। सौराष्ट्र और कच्छ में भी तेज बारिश संभव है। मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 3-4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में मौसम का हाल

उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मध्यम बारिश के साथ पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी संभव है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होगी, जिससे गर्मी से कुछ राहत मिलेगी। दक्षिण में केरल, कर्नाटक तट, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी भारी बारिश के साथ गरज-चमक की गतिविधियां बनी रहेंगी। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि और धूल भरी आंधी भी देखने को मिल सकती है।

कृषि और आम जनजीवन पर प्रभाव

खरीफ फसलों की बुआई के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलजमाव, फसल डूबने और सड़कों पर पानी भरने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। IMD ने नागरिकों से सतर्क रहने, मौसम अपडेट चेक करने और बिजली गिरने से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। कुल मिलाकर जुलाई में असमान वर्षा की वजह से कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात भी बन सकते हैं।