प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2026 में देशवासियों से इलेक्ट्रिक कार अपनाने की अपील की थी। इसका सीधा असर बाजार पर दिखाई दिया है। सरकारी वाहन पोर्टल के रजिस्ट्रेशन डेटा के अनुसार मई महीने में पैसेंजर इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में सालाना आधार पर 80.7 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस उछाल में टाटा मोटर्स ने बाजी मारी है।
पीएम मोदी की अपील ने बदली बाजार की दिशा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने मई में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की अपील की। उनका मकसद पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था। लोगों ने इस अपील को सकारात्मक रूप से लिया और इलेक्ट्रिक कारों की ओर रुझान बढ़ा। परिणामस्वरूप मई 2026 में EV सेगमेंट में जबरदस्त गति दिखी।
यह बढ़ोतरी सिर्फ संख्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है। सरकारी योजनाओं और बढ़ती जागरूकता ने मिलकर इस बदलाव को गति दी है।
मई 2026 के आंकड़े: 80.7% सालाना वृद्धि
ऑटोपंडित्ज की रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में कुल 25,880 इलेक्ट्रिक कारें बिकीं। जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा मात्र 14,323 यूनिट्स था। इस प्रकार एक साल में 80.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल 2026 के 24,753 यूनिट्स की तुलना में मई में 4.6 प्रतिशत की मासिक बढ़त भी दर्ज की गई।
यह आंकड़े Vahan पोर्टल के रजिस्ट्रेशन डेटा पर आधारित हैं, जो बाजार की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं। बढ़ती मांग के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास और मजबूत हो रहा है।
टाटा मोटर्स ने मारी बाजी, अन्य ब्रांड्स भी आगे
टाटा मोटर्स ने इस महीने EV बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी। कंपनी की लोकप्रिय मॉडल्स जैसे नेक्सॉन EV और टियागो EV ने अच्छी बिक्री दर्ज की। टाटा की विश्वसनीयता, रेंज और कीमत के संतुलन ने ग्राहकों को आकर्षित किया।
हालांकि अब बाजार में सिर्फ एक-दो कंपनियों का दबदबा नहीं रहा। नए ब्रांड्स और स्थापित कंपनियां मिलकर इस सेगमेंट को विस्तार दे रही हैं। MG, महिंद्रा, हुंडई और अन्य कंपनियां भी अपनी EV लाइनअप के साथ सक्रिय हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिल रहे हैं।
ईवी अपनाने के फायदे और चुनौतियां
इलेक्ट्रिक कारें न सिर्फ ईंधन खर्च बचाती हैं बल्कि प्रदूषण भी कम करती हैं। बढ़ते पेट्रोल-डीजल दामों के बीच EV मालिकाना हक की कुल लागत काफी कम हो जाती है। सरकार की FAME योजना और अन्य सब्सिडी ने भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया है।
फिर भी चुनौतियां बाकी हैं। चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार, बैटरी की कीमत और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभी भी सुधार की गुंजाइश रखती है। मई की इस बढ़ोतरी से उम्मीद जगी है कि आने वाले महीनों में और तेज रफ्तार देखने को मिलेगी।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गति बनी रही तो 2030 तक भारत EV बाजार में विश्व स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। पीएम मोदी की अपील ने न सिर्फ बिक्री बढ़ाई बल्कि लोगों के सोचने के तरीके को भी बदला है।
निष्कर्ष: मई 2026 के आंकड़े साबित करते हैं कि सही दिशा में की गई अपील का असर तुरंत दिखता है। टाटा के नेतृत्व में बढ़ता EV बाजार भारत को स्वच्छ और आत्मनिर्भर परिवहन की ओर ले जा रहा है। उपभोक्ताओं को अब इलेक्ट्रिक विकल्प चुनने का बेहतर समय है।