ऑकलैंड। भारत और न्यूजीलैंड के बीच संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की राजधानी ऑकलैंड में बिजनेस लीडर्स को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की। यह न केवल कूटनीतिक उपलब्धि है बल्कि साझा समृद्धि और नवाचार का नया संकल्प भी है।

ऑकलैंड में ऐतिहासिक संबोधन: साझा भविष्य की नींव

प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के सकारात्मक दृष्टिकोण और भारत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बैठक दोनों देशों के संबंधों के टर्निंग पॉइंट पर हो रही है। भारत की 140 करोड़ जनता की आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को लेकर आए प्रधानमंत्री ने बिजनेस लीडर्स की उपस्थिति को न्यूजीलैंड की नवाचार, उद्यमशीलता और भविष्योन्मुखी सोच का प्रतीक बताया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच मात्र नौ महीनों के रिकॉर्ड समय में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पूरा होने की जानकारी दी। यह समझौता बाजार पहुंच, निवेश, सेवाओं, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा गतिशीलता के नए अवसर खोलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि नए जोश के साथ काम करते हुए 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना बढ़ाया जा सकता है।

न्यूजीलैंड का बड़ा निवेश कमिटमेंट: विकास यात्रा में साझेदारी

न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल आर्थिक निवेश नहीं बल्कि भारत की विकास यात्रा में भागीदारी का प्रतीक बताया। भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। बढ़ती मध्यम वर्ग, बड़े पैमाने पर डिजिटल अपनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास भारत को अनोखी ग्रोथ स्टोरी बना रहे हैं।

सरकार की 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' की नीति से नीतिगत स्थिरता, राजनीतिक स्थिरता और निरंतर विकास सुनिश्चित हुआ है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत न केवल एक बाजार है बल्कि वैश्विक विकास के लिए लॉन्चपैड भी है।

विनिर्माण, एग्रीकल्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग के नए द्वार

भारत में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल्स समेत 14 सेक्टरों में लगभग 20 बिलियन डॉलर का समर्थन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड के बिजनेस लीडर्स को इस मैन्युफैक्चरिंग मोमेंटम का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया।

हवाई अड्डों, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, एयर कार्गो और पर्यटन क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट है। दोनों देश मिलकर कार्गो कॉरिडोर, फ्लाइट कनेक्टिविटी और संयुक्त पर्यटन पैकेज बना सकते हैं। कीवी, सेब, शहद और सीफूड जैसे पेरिशेबल सामान के लिए विशेष समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

न्यूजीलैंड की हॉर्टिकल्चर, डेयरी साइंस और फॉरेस्ट्री विशेषज्ञता तथा भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार, फूड पार्क और एग्री-टेक टैलेंट को जोड़कर फार्म-टू-मार्केट वैल्यू चेन और वैश्विक निर्यात प्लेटफॉर्म तैयार किए जा सकते हैं।

फिनटेक, स्पेस और स्मार्ट सिटी में सहयोग की अपार संभावनाएं

फिनटेक क्षेत्र में भारत वैश्विक नेता है जहां दुनिया के 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स होते हैं। दोनों देश डिजिटल पेमेंट्स के साथ-साथ ग्रीन बॉन्ड्स और ब्लेंडेड फाइनेंस में आगे बढ़ सकते हैं।

स्पेस सेक्टर को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया है। भारत में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स हैं और एक यूनिकॉर्न भी उभर चुका है। दोनों देशों की कंपनियां छोटे उपग्रहों, रिमोट सेंसिंग और ओशन मॉनिटरिंग में सहयोग कर सकती हैं।

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 शहरों में 8,000 से अधिक प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। शहरी गतिशीलता, जल प्रबंधन और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य की अपार संभावनाएं हैं।

माओरी बिजनेस लीडर्स का स्वागत: सस्टेनेबल और समावेशी व्यापार मॉडल

प्रधानमंत्री ने माओरी बिजनेस लीडर्स का विशेष अभिनंदन किया। भारत की सभ्यता और माओरी परंपरा दोनों में प्रकृति, समुदाय और सस्टेनेबिलिटी के प्रति गहरा सम्मान है। FTA में माओरी बिजनेस के लिए विशेष स्थान दिया गया है। इन साझा मूल्यों को जोड़कर समावेशी और सतत व्यापार का नया मॉडल तैयार किया जा सकता है।

युवा पीढ़ी के लिए नया रोडमैप: फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स और एक्सचेंज

प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स से मिलकर एक महत्वाकांक्षी बिजनेस रोडमैप बनाने का सुझाव दिया। कम से कम पांच फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स की पहचान कर समयबद्ध तरीके से उन्हें पूरा करने के लिए समीक्षा तंत्र बनाया जाए।

खेल संबंधों के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने 35 वर्ष से कम उम्र के बिजनेस डेलिगेशन का आदान-प्रदान करने का प्रस्ताव रखा। भारत से युवा बिजनेसमैन न्यूजीलैंड जाएं और न्यूजीलैंड के युवा भारत आएं ताकि नई पीढ़ी तैयार हो सके।