पार्श्व
पार्श्व नाम जैन धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर, भगवान पार्श्वनाथ के नाम से जुड़ा है। 'पार्श्व' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'किनारा' या 'पक्ष' होता है, लेकिन आध्यात्मिक संदर्भ में यह 'रक्षक' या 'सहायक' का प्रतीक है, जो सभी जीवों के प्रति करुणा और अहिंसा का भाव रखता है। भगवान पार्श्वनाथ ने अपने अनुयायियों को चार महाव्रतों के साथ-साथ 'अपरिग्रह' (अनासक्ति) का पांचवां महाव्रत भी दिया था, जिससे यह नाम त्याग और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बन जाता है।
अंक ज्योतिष के अनुसार, पार्श्व नाम का मूलांक 1 है, जो नेतृत्व, स्वतंत्रता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। इस नाम के जातक आमतौर पर आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी और अपने विचारों में मौलिक होते हैं। वे जीवन में नए रास्ते बनाने और चुनौतियों का सामना करने से नहीं डरते। ज्योतिषीय रूप से, सिंह राशि (Leo) के साथ इसका संबंध उन्हें एक मजबूत और प्रभावशाली व्यक्तित्व प्रदान करता है, जो अपने आसपास के लोगों को प्रेरित करने की क्षमता रखता है।