राजस्थान में 12 जून को मौसम एक बार फिर से करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में आंधी, मेघगर्जन और बारिश की गतिविधियां बढ़ने वाली हैं।

किन जिलों में रहेगा मौसम का सबसे ज्यादा असर?

जयपुर, भरतपुर, अलवर, दौसा, करौली, धौलपुर, अजमेर, कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ सहित पूर्वी राजस्थान के कई क्षेत्रों में दोपहर बाद मौसम अचानक बदल सकता है। इन इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। जयपुर, दौसा, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, भरतपुर, डीग, धौलपुर, ब्यावर और किशनगढ़ जैसे इलाकों में बादल छाने के साथ धूलभरी आंधी शुरू हो सकती है।

मौसम विभाग की चेतावनी और सावधानियां

मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार यह गतिविधियां 13 जून तक प्रभावी रह सकती हैं और 14 से 16 जून के बीच भी कई जिलों में मौसम सक्रिय बना रहेगा। तेज हवाओं से पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। खुले में काम करने वाले लोग, किसान और यात्री विशेष सावधानी बरतें। वज्रपात से बचाव के लिए सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है।

गर्मी से राहत लेकिन उमस की चुनौती

इस मौसम परिवर्तन से लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, बारिश के बाद उमस बढ़ सकती है जो स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों को विशेष ध्यान रखना चाहिए।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

किसानों को खेतों में नमी संरक्षण और फसलों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। तेज हवाएं और बारिश से पकी हुई फसलें प्रभावित हो सकती हैं। मौसम विभाग ने खेतों की तैयारी पहले से कर लेने की अपील की है। साथ ही पशुपालकों को भी पशुओं को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।

आगे का मौसम पूर्वानुमान

12 और 13 जून को मुख्य रूप से पूर्वी राजस्थान प्रभावित रहेगा। उसके बाद 14 से 16 जून तक भी कुछ जिलों में हल्की बारिश और आंधी की संभावना बनी रहेगी। पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में सूखा और गर्मी का असर जारी रह सकता है।

निष्कर्ष: मौसम विभाग की सलाह है कि सभी लोग ऐप या आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित अपडेट चेक करते रहें। अचानक मौसम बदलाव से सतर्क रहकर अनावश्यक जोखिम से बचें। इस बारिश से कृषि और पर्यावरण दोनों को फायदा पहुंच सकता है, बशर्ते सावधानी बरती जाए।