छह छक्के एक ओवर में लगाने वाले क्रिकेटर गिने-चुने ही सही, पर मौजूद हैं। सात लगाने वाला सिर्फ एक है।28 नवंबर 2022 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम के 'बी' ग्राउंड पर, विजय हजारे ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में महाराष्ट्र के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने उत्तर प्रदेश के बाएं हाथ के स्पिनर शिवा सिंह के एक ओवर में सात छक्के जड़ दिए। लिस्ट ए क्रिकेट के इतिहास में किसी गेंदबाज के एक ओवर में सात छक्के खाने का यह पहला मौका था।
ओवर का हिसाब साफ है। चार वैध गेंदों पर लगातार चार छक्के। पांचवीं गेंद नो-बॉल रही, जिस पर मिले फ्री-हिट को भी गायकवाड़ ने सीमा पार भेजा — और इसी छक्के के साथ उन्होंने अपना दोहरा शतक पूरा किया। फिर ओवर की बची दो वैध गेंदों पर दो और। शिवा सिंह कोण बदलते रहे, राउंड द विकेट से ओवर द विकेट आए, पर हर गेंद स्टैंड में पहुंची। (कई जगह यह दावा मिलता है कि नो-बॉल छठी गेंद पर थी; स्कोरकार्ड के मुताबिक वह पांचवीं डिलीवरी थी।)
ओवर में 43 रन बने। यहां एक बारीकी अहम है। 43 रन का यह आंकड़ा अपने आप में पहली बार नहीं हुआ — 2018 की फोर्ड ट्रॉफी में ब्रेट हैम्पटन और जो कार्टर ने मिलकर विलेम लुडिक के एक ओवर में इतने ही रन बनाए थे। फर्क यह कि वह दो बल्लेबाजों का साझा कमाल था; गायकवाड़ ने अकेले किया, और सातों बार गेंद को छक्के के लिए मारा।
संदर्भ समझिए। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के सिर्फ हर्शल गिब्स, युवराज सिंह, कीरन पोलार्ड और जसकरण मल्होत्रा ही लगा सके हैं। सात किसी ने नहीं — किसी भी प्रारूप में नहीं।यह एक ओवर पूरी पारी का सार भी नहीं था। गायकवाड़ 159 गेंदों पर 220 रन बनाकर नाबाद लौटे, जिसमें 16 छक्के और 10 चौके शामिल रहे। महाराष्ट्र के बाकी बल्लेबाजों ने मिलाकर 142 गेंदों पर सिर्फ 96 रन बनाए, और बेचारे शिवा सिंह नौ ओवर में 88 रन देकर बिना विकेट रहे। महाराष्ट्र ने 330/5 का स्कोर खड़ा किया और 58 रन से मैच जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
खुद गायकवाड़ ने बाद में बताया कि पांचवें छक्के के बाद उनके ज़हन में सिर्फ एक नाम आया — युवराज सिंह, जिन्होंने 2007 टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ छह छक्के लगाए थे।चेन्नई सुपर किंग्स के लिए लगातार रन बनाने वाले गायकवाड़ इस पारी से बहुत पहले ही भारतीय क्रिकेट के भरोसेमंद नामों में गिने जाने लगे थे। 2023 के एशियन गेम्स में उन्होंने टीम इंडिया की कप्तानी भी की।
पर वह एक ओवर अलग जगह बैठता है। रिकॉर्ड टूटते हैं, बनते हैं। यह वाला, साढ़े तीन साल बाद भी, वहीं खड़ा है जहां छोड़ा गया था।