अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने हाल ही में चेतावनी जारी की है कि अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और यह 2026-27 की सर्दियों तक और मजबूत हो सकता है। पिछले महीने इसकी पुष्टि होने के बाद अब भारत समेत कई देशों में मौसम संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जो प्रशांत महासागर में गर्म पानी के जमा होने से पैदा होती है और इससे वैश्विक मौसम पैटर्न बिगड़ जाता है।
अल नीनो का भारत के मॉनसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?
जब अल नीनो सक्रिय होता है तो भारत की मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। सामान्य स्थिति में हिंद महासागर से नम हवाएं भारत की ओर आती हैं, लेकिन अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से ये हवाएं अपना रास्ता बदल लेती हैं। नतीजतन, देश में सामान्य से कम बारिश होती है, जिससे सूखे की स्थिति बन सकती है और गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि अल नीनो वाले वर्षों में भारत के कई हिस्सों में गंभीर सूखा पड़ चुका है, जिसका कृषि और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।
फसलों पर बुरा असर, किसान चिंतित
भारत में कुल वर्षा का करीब 70 प्रतिशत मॉनसून से होता है, जो कृषि क्षेत्र के लिए जीवन रेखा है। यह क्षेत्र देश की 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में लगभग 18 प्रतिशत योगदान देता है। वाइसाला एक्सवेदर के विशेषज्ञ काइल टैपली ने कहा, “अल नीनो दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत में फसलों की पैदावार पर बुरा असर डाल सकता है क्योंकि यह कम बारिश से जुड़ा होता है।” चावल, कपास और सोयाबीन जैसी मुख्य फसलों की पैदावार घट सकती है। सर्दियों की फसलों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
दक्षिण-पूर्व एशिया और अमेरिका पर भी असर
इंडोनेशिया के चावल किसान इस बार सूखे से निपटने के लिए समय से पहले बुवाई कर रहे हैं। मलेशिया के आर्थिक मंत्री ने चेतावनी दी है कि फसलों की पैदावार में 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। वहीं अमेरिका में अल नीनो के कारण हरिकेन का मौसम कमजोर रहने की उम्मीद है। टैपली ने कहा, “अटलांटिक में तूफानों का मौसम सामान्य से कमजोर रह सकता है, लेकिन एक शक्तिशाली तूफान हमेशा संभव है।” तूफान का मौसम 1 जून से शुरू होकर 30 नवंबर तक चलता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की चुनौतियां
पिछले वर्षों में अल नीनो ने भारत में कई बार मॉनसून को प्रभावित किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे मौसम पैटर्न और अधिक अनियमित हो सकते हैं। सरकार और कृषि विशेषज्ञ पहले से ही तैयारी कर रहे हैं ताकि सूखे की स्थिति में पानी का प्रबंधन बेहतर हो सके और फसल बीमा जैसी योजनाओं का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
निष्कर्ष: अल नीनो की वापसी ने भारत सहित कई देशों में चिंता बढ़ा दी है। कमजोर मॉनसून, सूखा और बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाने होंगे। किसानों की मदद और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर बुरा असर न पड़े।