बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के दर्शक इन दिनों बॉक्स ऑफिस की रेस को करीब से देख रहे हैं। राम चरण और जान्हवी कपूर की फिल्म 'पेद्दी' ने धमाकेदार ओपनिंग के साथ शुरुआत की, लेकिन पहले हफ्ते के आखिरी दिनों में कमाई में भारी गिरावट आई है। वहीं वरुण धवन की 'है जवानी तो इश्क होना है' और बॉबी देओल की 'बंदर' भी पहले हफ्ते में ही दर्शकों का साथ नहीं पा सकीं। अब शुक्रवार को तीन नई बड़ी हिंदी फिल्मों के रिलीज होने से कंपटीशन और तेज हो गया है।
पेद्दी की ओपनिंग तो धांसू, लेकिन वीकडे में गिरावट
राम चरण अभिनीत स्पोर्ट्स ड्रामा 'पेद्दी' ने ओपनिंग डे पर 51 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की। प्रीमियर शोज सहित पहले दिन भारत में कुल नेट कलेक्शन 69.50 करोड़ के करीब रहा और वर्ल्डवाइड 135 करोड़ प्लस पहुंच गया। फिल्म ने पहले वीकेंड में जोरदार परफॉर्मेंस दी, लेकिन उसके बाद रोजाना कमाई घटी। पहले हफ्ते के अंतिम दिन यह 7 करोड़ से नीचे रह गई।
मूल रूप से तेलुगु में बनी इस फिल्म को हिंदी डब वर्जन में दर्शक कम मिले। हालांकि दूसरे वीकेंड में यह भारत में 200 करोड़ और वर्ल्डवाइड 300 करोड़ क्लब में एंट्री जरूर कर लेगी। मेकर्स को उम्मीद है कि वर्ड ऑफ माउथ और फैमिली ऑडियंस से सपोर्ट मिलेगा, लेकिन वीकडे में राह चुनौतीपूर्ण रहेगी।
वरुण धवन और बॉबी देओल की फिल्में फंस गईं मुश्किल में
वरुण धवन की 'है जवानी तो इश्क होना है' ने भी पहले हफ्ते में ही पसीने छुड़ा दिए। फिल्म ने वीकेंड में कुछ कमाई की, लेकिन वीकडे में औसत प्रदर्शन रहा। पहले हफ्ते में कुल कलेक्शन 40 करोड़ के आसपास पहुंचा, जो उम्मीद से काफी कम है। डेविड धवन डायरेक्टोरियल फैमिली एंटरटेनमेंट है, लेकिन दर्शक इसे खूब नहीं अपनाए।
दूसरी ओर, बॉबी देओल की 'बंदर' तो पूरी तरह डिजास्टर साबित हुई। अनुराग कश्यप निर्देशित इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर महज 50 लाख रुपये कमाए और कुल कलेक्शन 4 करोड़ से नीचे रहा। दर्शकों ने इसे नजरअंदाज कर दिया, जिससे यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप की लिस्ट में शामिल हो गई।
नई रिलीज ने बढ़ाई टेंशन, वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर
शुक्रवार 12 जून को तीन बड़ी हिंदी फिल्में रिलीज हुईं - कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता', इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा' और मनोज बाजपेयी की 'गवर्नर'। अलग-अलग जॉनर वाली ये फिल्में पूरी तरह दर्शकों के वर्ड ऑफ माउथ पर टिकी हैं। अगर रिव्यूज और मुंहजुबानी अच्छी रही तो कमाई बढ़ेगी, वरना पहले वीकेंड के बाद गिरावट तय है।
इन नई फिल्मों के आने से 'पेद्दी' की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, खासकर हिंदी बेल्ट में। शोज की संख्या पर असर पड़ेगा। 'है जवानी तो इश्क होना है' को भी नुकसान होने वाला है। थिएटर्स में सीट्स की उपलब्धता कम होने से पुरानी फिल्मों का कारोबार प्रभावित होगा।
क्या कहते हैं ट्रेंड्स और भविष्य
पेद्दी ने पहले हफ्ते में वर्ल्डवाइड 345 करोड़ के करीब पहुंचकर राम चरण की स्टार पावर को दोहराया। लेकिन सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए मजबूत होल्ड जरूरी है। वहीं हिंदी सिनेमा में इन दिनों ओरिजिनल स्टोरीज और परफॉर्मेंस पर दर्शक भरोसा जता रहे हैं। नई रिलीज इस ट्रेंड को और मजबूत कर सकती हैं।