अल नीनो की वापसी: भारत में मॉनसून को खतरा, सूखा और रिकॉर्ड गर्मी की आहट

अमेरिका के मौसम केंद्र ने अल नीनो की वापसी की पुष्टि की है। भारत में इस बार कमजोर मॉनसून, सूखे की स्थिति और तेज गर्मी का खतरा मंडरा रहा है। कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव जानिए।

Bhavya Choudhary
Bhavya Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Chief Editor
Jun 13, 2026 • 5:24 PM  0
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अल नीनो की वापसी: भारत में मॉनसून को खतरा, सूखा और रिकॉर्ड गर्मी की आहट
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अल नीनो की वापसी: भारत में मॉनसून को खतरा, सूखा और रिकॉर्ड गर्मी की आहट

अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने हाल ही में चेतावनी जारी की है कि अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और यह 2026-27 की सर्दियों तक और मजबूत हो सकता है। पिछले महीने इसकी पुष्टि होने के बाद अब भारत समेत कई देशों में मौसम संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जो प्रशांत महासागर में गर्म पानी के जमा होने से पैदा होती है और इससे वैश्विक मौसम पैटर्न बिगड़ जाता है।

अल नीनो का भारत के मॉनसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जब अल नीनो सक्रिय होता है तो भारत की मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। सामान्य स्थिति में हिंद महासागर से नम हवाएं भारत की ओर आती हैं, लेकिन अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से ये हवाएं अपना रास्ता बदल लेती हैं। नतीजतन, देश में सामान्य से कम बारिश होती है, जिससे सूखे की स्थिति बन सकती है और गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि अल नीनो वाले वर्षों में भारत के कई हिस्सों में गंभीर सूखा पड़ चुका है, जिसका कृषि और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।

फसलों पर बुरा असर, किसान चिंतित

भारत में कुल वर्षा का करीब 70 प्रतिशत मॉनसून से होता है, जो कृषि क्षेत्र के लिए जीवन रेखा है। यह क्षेत्र देश की 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में लगभग 18 प्रतिशत योगदान देता है। वाइसाला एक्सवेदर के विशेषज्ञ काइल टैपली ने कहा, “अल नीनो दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत में फसलों की पैदावार पर बुरा असर डाल सकता है क्योंकि यह कम बारिश से जुड़ा होता है।” चावल, कपास और सोयाबीन जैसी मुख्य फसलों की पैदावार घट सकती है। सर्दियों की फसलों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

Frequently Asked Questions 2

उत्तर: अल नीनो प्रशांत महासागर में गर्म पानी के जमा होने की प्रक्रिया है जो व्यापारिक हवाओं के कमजोर होने से होती है।

उत्तर: कमजोर मॉनसून, सूखा और फसलों की कम पैदावार।

Bhavya Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Chief Editor

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