45 हजार करोड़ का घाटा झेलते हुए भी इन 3 सरकारी तेल कंपनियों को बेचने से क्यों डरती है सरकार?

भारत की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां भारी घाटे में चल रही हैं, फिर भी सरकार उन्हें बेचने में हिचकिचा रही है। राष्ट्रीय संकटों में इनकी भूमिका, ईंधन सुरक्षा और पिछले निजीकरण प्रयासों की पूरी कहानी जानें।

Bhavya Choudhary
Bhavya Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Chief Editor
Jun 28, 2026 • 5:28 PM  0
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45 हजार करोड़ का घाटा झेलते हुए भी इन 3 सरकारी तेल कंपनियों को बेचने से क्यों डरती है सरकार?
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28 Jun 2026
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45 हजार करोड़ का घाटा झेलते हुए भी इन 3 सरकारी तेल कंपनियों को बेचने से क्यों डरती है सरकार?

भारत ने जब भी कोई बड़ा संकट झेला है, देश की सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियां (ओएमसी) ने ईंधन आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखकर अहम भूमिका निभाई है। चाहे 2015 की चेन्नई बाढ़ हो, कोविड-19 महामारी हो या हालिया पश्चिम एशिया का तनाव जो कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है, इन कंपनियों ने हमेशा देश की ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी।

ओएमसी कंपनियों की रणनीतिक अहमियत

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) देश की ऊर्जा जीवनरेखा हैं। विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रीय आपातकाल में इन पर सरकार की पकड़ ढीली करने की हिम्मत नहीं जुटाई जा रही। ये कंपनियां कम मुनाफे, सरकारी हस्तक्षेप और बड़े परिचालन के कारण आलोचना का शिकार रहती हैं, लेकिन संकट के समय इनकी उपयोगिता साबित होती है।

निजीकरण की पुरानी कोशिशें और असफलता

वर्ष 2002 में बीपीसीएल और एचपीसीएल को बेचने की योजना बनी, लेकिन उच्चतम न्यायालय के फैसले ने इसे रोक दिया। 2020 में फिर प्रयास हुआ, मगर पर्याप्त बोलियां न मिलने से प्रक्रिया रुक गई। 2026 तक भी इन कंपनियों का पूर्ण निजीकरण टलता दिख रहा है। सरकार इनकी रणनीतिक भूमिका को देखते हुए सतर्क है।

Frequently Asked Questions 2

उत्तर: हालिया आंकड़ों के अनुसार लगभग 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक।

उत्तर: न्यायालय के फैसले, अपर्याप्त बोलियां और रणनीतिक महत्व के कारण।

Bhavya Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Chief Editor

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