आरबीआई ने एफसीएनआर जमा के लिए डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की
भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के लिए नई एफसीएनआर (बी) जमा पर डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की है। तीन से पांच साल की अवधि वाली इस योजना से बैंक आसानी से विदेशी पूंजी जुटा सकेंगे। जानिए पूरी डिटेल।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यूएस डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा की घोषणा की है। यह सुविधा विशेष रूप से नई और नवीनीकृत विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (एफसीएनआर बी) जमा पर उपलब्ध होगी। सोमवार को जारी सर्कुलर में केंद्रीय बैंक ने इस योजना को तीन साल से पांच साल तक की न्यूनतम अवधि के लिए लागू करने की जानकारी दी।
स्वैप सुविधा का उद्देश्य और दायरा
यह नई सुविधा एडी कैटेगरी-1 बैंकों को उपलब्ध होगी, जो किसी भी स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय मुद्रा में जमा जुटा सकेंगे। आरबीआई के साथ स्वैप केवल यूएस डॉलर में ही होगा। बैंक एक मिलियन डॉलर के गुणकों में आरबीआई को डॉलर बेच सकेंगे और स्वैप अवधि समाप्त होने पर समान राशि वापस खरीद सकेंगे। इस कदम से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलने की उम्मीद है और बैंक एनआरआई से अधिक जमा आकर्षित कर सकेंगे।
जमा की शर्तें और लॉक-इन नियम
इस स्वैप व्यवस्था के तहत जमा की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष होगी। जमा पर एक साल का लॉक-इन पीरियड लागू रहेगा। बैंकों को एक साल बाद समय से पहले निकासी की अनुमति देने का विवेकाधिकार होगा, हालांकि यह उनकी आंतरिक नीति पर निर्भर करेगा। आरबीआई के साथ किए गए स्वैप को रद्द नहीं किया जा सकता।