जन्माष्टमी 2026: द्वापर जैसा दुर्लभ संयोग, आज कान्हा का जन्मोत्सव
इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और शुक्रवार का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। जानें व्रत विधि, जप मंत्र और पटना मंदिरों की भव्य तैयारियां।
जन्माष्टमी 2026: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की उदयाकालिक अष्टमी तिथि पर शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का पावन जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस वर्ष द्वापर युग जैसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, जब अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, शुक्रवार का दिन और वृषभ लग्न एक साथ विद्यमान हैं। पद्मपुराण और गौतमी तंत्र संहिता में वर्णित महापुण्यप्रदायक जयंती योग के साथ हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत सुयोग भी इस अवसर पर बन रहा है। गृहस्थ और साधु-संत दोनों एक ही दिन व्रत रखकर कान्हा का जन्मोत्सव मनाएंगे।
दुर्लभ जयंती योग और खगोलीय संयोग
इस बार अष्टमी तिथि सूर्योदय से लेकर रात्रि बेला तक प्रभावी रहेगी। रोहिणी नक्षत्र का संयोग रात करीब 11:04 बजे तक रहेगा। जन्मोत्सव के समय चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर कर रहे हैं, जो सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में भी भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के इसी संयोग में हुआ था। जयंती योग को महापुण्यप्रदायक माना गया है। इस पावन अवसर पर की गई साधना, जप और व्रत से ईश्वर प्रदत्त असीम ऊर्जा प्राप्त होती है। जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहा जाता है।
पटना के प्रमुख मंदिरों में भव्य तैयारी
बुद्धमार्ग स्थित इस्कॉन मंदिर, मीठापुर गौड़ीय मठ, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी और महावीर मंदिर समेत शहर के प्रमुख मंदिरों तथा ठाकुरबाड़ियों में जन्मोत्सव की भव्य तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और मध्यरात्रि पूजा का आयोजन किया जाएगा। 24 घंटे का निर्जला व्रत रखने वाले भक्त 5 सितंबर की सुबह व्रत का पारण करेंगे।